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पंचायत चुनाव

सुरेश ने साबित कर दिया कि बाप आखिर बाप ही होता है, बेटा को दिया मात

चंपारण की खबर ::

बाप के खिलाफ मैदान में उतरे बेटे को 149 वोट ही मिले, पिता बन गए मुखिया

मोतिहारी / राजन दत्त द्विवेदी। जिले के पताही प्रखंड स्थित सरैया गोपाल पंचायत चुनाव में निवर्तमान मुखिया
सुरेश प्रसाद सिंह ने इस बार के चुनाव में बेटे के चुनावी विरोध के बावजूद साबित कर दिया है कि बाप आखिर बाप ही होता है। बता दें कि जिले के पताही प्रखंड स्थित सरैया गोपाल पंचायत पर मंगलवार को पंचायत के लोगों के साथ अन्य लोगों नजर टिकी थी। यहां मुखिया पद के लिए बाप-बेटे के बीच मुकाबला था। यहां सुरेश प्रसाद सिंह के बड़े बेटे अंशु सिंह उनके खिलाफ ही चुनाव लड़ गए। पंचायत में मुखिया पद पर कुल 7 प्रत्याशी खड़े थे। इनमें उमाशंकर सिंह, उमेश चंद्र सिंह, रामेश्वर ठाकुर, राजेन्द्र साह, संदीप कुमार और हरित आकाश उर्फ अंशु सिंह शामिल थे।
सुरेश प्रसाद सिंह निवर्तमान मुखिया और रिटायर्ड शिक्षक हैं। मुखिया पद पर सुरेश प्रसाद जीत गए हैं। उनको कुल 1386 वोट मिले। वहीं, उपविजेता उमेश प्रसाद सिंह को 1340 वोट मिले। जबकि, अंशु सिंह को सिर्फ 149 वोट मिले। वह छठे स्थान पर रहे।

सुरेश ही देते थे अंशु को घर चलाने का खर्च ::

सुरेश प्रसाद सिंह 2016 में रिटायर्ड होने के बाद पंचायत चुनाव लड़े और मुखिया पद जीत गए। लोगों ने बताया कि बड़े बेटे अंशु सिंह का इधर कुछ दिनों से पिता से विवाद चल रहा था। पिता ही उसे घर चलाने के लिए खर्च देते थे। छोटे बेटे लड्‌डू सिंह बीजेपी नेता व ठेकेदार हैं। यही वजह है कि वह पिता के प्रिय भी थे। इस बात से अंशु सिंह चिढ़े रहते थे। इसी वजह से इस बार उन्होंने पिता के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। बेटे को सामने मैदान में पाकर पिता ने जोर लगा दिया और साबित कर दिखाया कि बाप आखिर बाप ही होता है।

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